Krashak Kranti (KAKKA)

प्रशिक्षण और सामुदायिक गतिविधि

प्रशिक्षण और सामुदायिक गतिविधि

प्रशिक्षण से तात्पर्य किसान भाईयों को कुशल खेती के लिए मानसिक, आर्थिक और तकनीकी के रूप में मजबूत करना, अर्थात “ढर्रा पैटर्न” से मुक्ति एवम “भेड़ चाल” वाली व्यवस्था को दूर करने से है। कृषक क्रांति अनुसन्धान केंद्र – KAKKA  का उद्देश्य किसान बंधुओं को हर प्रकार की ट्रेनिंग दे कर उनके मनोबल को बड़ा की समस्त प्रकार की जानकारी देना ही हमारा लक्ष्य है। जिससे किसान बंधु नवीनतम तकनीक की जानकारी प्राप्त कर अपनी खेती में चार चांद लगा सके और आर्थिक विकास की और अग्रसर हो सके। साथ ही जीवन शैली बदल कर आगे बड़ सके।

सेवाएं: प्रशिक्षण औरसामुदायिक गतिविधि (सदस्यों के लिए निःशुल्क*),एसएचजी समूह गठन, किसान उत्पादक कंपनी (एफपीओ), किसानों को उनकी भूमि, शक्ति, विशेषज्ञता और शिक्षा स्तर के आधार पर वर्गीकरण  – (1 हेक्टेयर से कम  या सीमांत किसान, 2से 1 हेक्टेय, 2हेक्टेयर से अधिक), गर्भवती महिला जागरूकता शिविर, सफ़ाई, नशा मुक्ति, सेनेटरी, विपणन द्वारा पारंपरिक और स्थानीय शिल्प को जीवित रखना और इसे लघु उद्योग के रूप में अपनाने के लिए लोगों को बढ़ावा देना

प्रशिक्षण किसानों के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि इससे वे नए तकनीकों, विवेकपूर्ण फसल व्यवस्था, समय पर बीज बोने और उनकी संरचना और अभिव्यक्ति के लिए शिक्षित होते हैं। वे अधिक उत्पादक और सफल किसान बन सकते हैं जो बाजार के लिए उत्पादन करते हैं और उनकी आय बढ़ती है।

सामुदायिक गतिविधियां किसानों के लिए बहुत फायदेमंद होती हैं। इनमें से कुछ फायदे निम्नलिखित हैं:

  1. वे सामूहिक रूप से फसल की खरीद कर सकते हैं जो उनके लिए अलग-अलग क्षेत्रों में सस्ती होती है।
  2. वे सामूहिक रूप से अपनी फसल की बिक्री कर सकते हैं जो अधिक मूल्य के साथ बेची जा सकती है।
  3. वे सामूहिक रूप से फसल के लिए कर वसूल कर सकते हैं जो व्यक्तिगत रूप से अधिक कठिन हो सकता है।
  4. सामूहिक रूप से उपलब्ध संसाधनों के साथ, किसान नए तकनीकों और संचार का लाभ उठा सकते हैं।
  5. सामूहिक रूप से किसान संगठन करने से उनकी आवाज एक सामूहिक रूप से सुनी जाती है जो उनकी स्थिति में सुधार लाने में मदद कर सकती है।
  6. सामूहिक रूप से किसान अपने बचत को संगठित रूप से निवेश कर सकते हैं और इस तरीके से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है।

किसानों के लिए कई प्रकार के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। कुछ महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कोर्स निम्नलिखित हैं:

  1. विवेकपूर्ण फसल व्यवस्था
  2. समय पर बीज बोने की विधियां
  3. खेती के लिए उन्नत तकनीक
  4. खेती की अधिकतम उत्पादकता कैसे प्राप्त करें
  5. अर्थव्यवस्था की अधिकतम संभवता कैसे हासिल करें

स्वयं सहायता समूह किसानों द्वारा बनाए गए समूह होते हैं जो अपनी संगठनात्मक और आर्थिक रूप से स्वायत्त होते हैं। इन समूहों के माध्यम से किसान उन्नत तकनीकों, बीज, खाद, उपयुक्त मूल्य की खरीद और अपनी फसलों की बिक्री कर सकते हैं। ये समूह किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाते हैं, जिससे उन्हें बचत और निवेश करने के लिए भी संभवता मिलती है।

समुदाय में खेती से संबंधित कई गतिविधियां आयोजित की जा सकती हैं जैसे कि: किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए वार्षिक सम्मेलन आयोजित करना

खेती से संबंधित नए तकनीकों और उपकरणों का प्रदर्शन करना जैसे कि स्टॉक और मशीनरी शो

खेती के सम्बन्ध में विशेष व्याख्यान आयोजित करना

किसानों के बीच अनुभव साझा करना जो उनकी फसल उत्पादन में सफल रहे हों

खेती से जुड़े सामाजिक गतिविधियां आयोजित करना, जैसे कि जल-संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और बिजली बचाओ आदि।

किसानों को उन्नत तकनीकों और नए उत्पादों का उपयोग करने के लिए तैयार करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:

प्रशिक्षण: किसानों को उन्नत तकनीकों का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षण देने से उन्हें उस तकनीक की जानकारी होती है और वह उसका सही उपयोग कर सकते हैं।

उत्पाद डेमो: उत्पाद डेमो के माध्यम से किसानों को नए उत्पादों के बारे में जानकारी दी जाती है और उन्हें उसके उपयोग से संबंधित सभी पहलुओं की जानकारी मिलती है।

वीडियो सीखना: इंटरनेट पर उपलब्ध वीडियो के माध्यम से भी किसानों को नए उत्पादों और तकनीकों के बारे में जानकारी मिलती है।

उत्पादकों से संपर्क: उत्पादकों या उनके विशेषज्ञों से संपर्क करके किसानों को नए उत्पादों और तकनीकों के बारे में जानकारी मिलती है और वह उन्हें उनके उपयोग और लाभ के बारे में बता सकते हैं।

स्थानीय बाजारों और अन्य विपणन संरचनाओं के विकास के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:

प्रशिक्षण कार्यक्रम: किसानों को विपणन और विपणन संरचनाओं के बारे में जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। इससे किसानों को उनके उत्पादों को बेचने के लिए विभिन्न विपणन संरचनाओं के बारे में जानकारी मिलती है।

स्थानीय विपणन संरचनाओं का पुनर्विचार: किसानों को स्थानीय विपणन संरचनाओं के बारे में जानकारी देकर उन्हें उनके उत्पादों को सीधे अंत उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का तरीका समझाया जा सकता है।

संगठन गठन: किसानों को संगठन गठन करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है, जिससे वे अपने उत्पादों को बेचने और विपणन संरचनाओं के साथ नेगोशिएट करने में सक्षम होते हैं।

किसान समुदायों को संगठित करने के कई तरीके हैं। निम्नलिखित उनमें से कुछ हैं:

किसान संगठनों का गठन: किसान समुदायों को संगठित करने के लिए किसान संगठनों का गठन किया जा सकता है। इससे किसानों को अपने अधिकारों की संरक्षण करने और समूचे समुदाय के लिए समूचे विकास के लिए आवाज बुलंद करने में मदद मिलती है।

समूह गठन: किसान समूहों को गठित करने के लिए स्थानीय स्तर पर समूहों का गठन किया जा सकता है। इससे किसानों के बीच ज्ञान साझा करने और उनके साथ नेटवर्किंग करने का मौका मिलता है।

विपणन समूह: किसान विपणन समूहों को गठित करने से किसानों को अपने उत्पादों को बेचने के लिए बेहतर विपणन संरचनाओं के साथ नेगोशिएट करने में मदद मिलती है।

 

किसान समुदायों को संगठित करने के फायदे कुछ इस प्रकार हो सकते हैं:

 

अधिकारों की संरक्षण: संगठित किसान समुदायों के पास अपने अधिकारों की संरक्षा करने के लिए अधिक शक्ति होती है।

समूचे समुदाय के विकास का समर्थन: संगठित किसान समुदायों के अंतर्गत समूचे समुदाय के विकास के लिए संगठन और आर्थिक सहायता की उपलब्धता होती है।

समूचे समुदाय के लिए सरकारी योजनाओं के लाभ का संबंध: संगठित किसान समुदायों के अंतर्गत समूचे समुदाय को सरकारी योजनाओं और लाभों से जुड़ा होने का मौका मिलता है।

कृषि विकास के लिए सहयोग: संगठित किसान समुदायों के अंतर्गत किसानों को उनके कृषि विकास के लिए सहयोग की उपलब्धता होती है, जैसे कि उन्हें अधिक तकनीकी जानकारी, नई फसल विकास की जानकारी और कृषि विकास के लिए संसाधनों की उपलब्धता होती है।

किसानों को संबंधित स्थानों पर प्रशिक्षण और तकनीकी ज्ञान की प्रदान करने के लिए कुछ अहम तरीके निम्नलिखित हैं:

कृषि विभाग द्वारा संचालित ट्रेनिंग प्रोग्राम: शासकीय कृषि विभाग कृषि तकनीकों और उनके लाभों के बारे में स्थानीय किसानों को प्रशिक्षण देता है। ये प्रशिक्षण कार्यक्रम कई विषयों पर होते हैं, जैसे कि खेती, उत्पादन, फसल विकास, जैविक खेती, तकनीकी जानकारी और जैविक खाद का उपयोग करना आदि।

ग्रामीण कृषि विद्यालयों के द्वारा प्रशिक्षण: ग्रामीण कृषि विद्यालयों में कृषि के विभिन्न पहलुओं पर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। ये कार्यक्रम शिक्षा के स्तर के अनुसार विभिन्न होते हैं और विद्यालय की सुविधाओं पर निर्भर करते हैं।

कृषि संबंधित निजी संगठनों द्वारा प्रशिक्षण: कुछ निजी संगठनों द्वारा कृषि तकनीकों, उत्पादन तकनीकों, कृषि विकास के लिए न एतिहासिक और सामुदायिक अध्ययन संबंधित विषयों पर प्रशिक्षण भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

किसानों के साथ संगठन बनाने और सहयोग करने के कुछ तरीके निम्नलिखित हैं:

स्थानीय समुदाय के लोगों से बातचीत करें: स्थानीय समुदायों के लोगों से बातचीत करें और उनसे उनकी समस्याओं और जरूरतों के बारे में जानें। इससे उन्हें आपके प्रति विश्वास और सहयोग का एहसास होगा।

समुदाय के विभिन्न सदस्यों के साथ मिलकर काम करें: समुदाय के विभिन्न सदस्यों के साथ मिलकर काम करें और उन्हें अपने काम में शामिल करें। इससे समुदाय के सदस्यों का आपके प्रति विश्वास बढ़ेगा।

समुदाय के विभिन्न स्तरों पर चर्चा करें: समुदाय के विभिन्न स्तरों पर चर्चा करें और उन्हें अपनी समस्याओं के बारे में विस्तार से बताएं। इससे समुदाय के सदस्यों का आपके प्रति आकर्षण बढ़ेगा और वे अपनी समस्याओं के माध्यम से आपस में जुड़ सकेंगे।

समुदाय के सदस्यों के साथ बातचीत करें: समुदाय के सदस्यों के साथ नियमित रूप से बातचीत करें और उनसे उनकी समस्याओं और जरूरतों के बारे में पूछताछ करें। इससे आप उन्हें अपने साथ संगठित होने के लिए प्रेरित करेंगे।

समुदाय के सदस्यों को शिक्षित करें: समुदाय के सदस्यों को शिक्षित करना महत्वपूर्ण है, जिससे उन्हें अपनी समस्याओं के बारे में समझने में मदद मिलेगी और वे स्वयं समस्याओं का समाधान ढूंढने में सक्षम होंगे।

संगठनों के साथ सहयोग करें: स्थानीय संगठनों जैसे कि किसान संगठन, सहकारी समिति, एनजीओ आदि से सहयोग करें। इन संगठनों के माध्यम से आप आपके समुदाय के सदस्यों को जान सकते हैं और उनकी समस्याओं का समाधान ढूंढने में मदद कर सकते हैं।

समुदाय के सदस्यों के साथ संवाद जारी रखें: समुदाय के सदस्यों के साथ संवाद जारी रखना महत्वपूर्ण है। उन्हें जानना चाहिए कि आप उनकी समस्याओं के समाधान में सक्षम हैं और आप उनकी मदद करने के लिए उनके साथ हमेशा संपर्क में हैं।

विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करें: किसानों के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करें जैसे कि कृषि तकनीक, फसल प्रबंधन, पशुपालन, औषधीय पौधों का उत्पादन आदि। इससे किसान अपनी कौशल और ज्ञान को बढ़ा सकते हैं जिससे उनकी फसल और पशु पालन तकनीक में सुधार होगा।

किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूक करें: सरकार अक्सर किसानों के लिए विभिन्न योजनाओं का आयोजन करती है जैसे कि फसल बीमा, कृषि ऋण, सब्सिडी आदि। किसानों को इन योजनाओं के बारे में जागरूक करना चाहिए ताकि वे उनका लाभ उठा सकें।

किसानों को विभिन्न बैंकिंग सेवाओं के बारे में जागरूक करें: बैंकों और वित्तीय संस्थाओं की विभिन्न सेवाएं जैसे कि कृषि ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड, सहकारी समितियों की सेवाएं आदि किसानों को लाभ पहुंचान में मदद कर सकती हूँ। किसानों को इन सेवाओं के बारे में जागरूक करना चाहिए ताकि वे उन्हें लाभान्वित कर सकें।